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शनिवार, 17 मार्च 2018

दिमाग़ी सेहत का पैमाना

हाल में हुई रिसर्च के मुताबिक़ हमारे व्यक्तित्व का ताल्लुक़ हार्मोन्स और रोगों से लड़ने की क्षमता से होता है. इसी के आधार पर हमारी जिस्मानी और दिमाग़ी सेहत का पैमाना तय होता है.
इसके अलावा हमारे व्यक्तित्व का आनुवांशिक आधार भी होता है. इसका असर हमारे बर्ताव और जिस्म दोनों पर पड़ता है.
एक रिसर्च के मुताबिक़ दिमाग़ में होने वाली प्रतिक्रियाओं के मुताबिक़ हार्मोन्स काम करते हैं और उसी के आधार पर हम हंसमुख, कम बोलने वाले या हाज़िर जवाब बन जाते हैं.
मिसाल के लिए जब हम तनाव में होते हैं, तो शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन पैदा होता है. इस हार्मोन पर की गई शुरुआती रिसर्च के नतीजे अलग-अलग पाए गए हैं.
वैसे भी ये रिसर्च मुंह से निकलने वाली लार को आधार बनाकर की गई थी. पाया गया कि लार में इस हार्मोन का स्तर एक ही दिन में कई बार घट और बढ़ रहा है. लिहाज़ा इसके नतीजों को फैसलाकुन नहीं माना गया....


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