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शनिवार, 24 मार्च 2018

महारानी एलिजाबेथ प्रथम इंग्लैण्ड की महारानी थीं।

महारानी एलिजाबेथ प्रथम इंग्लैण्ड की महारानी थीं। भारत पर काफ़ी लम्बे समय तक शासन करने वाली ईस्ट इण्डिया कम्पनीका आरम्भ महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा वर्ष 1600 ई. के अन्तिम दिन प्रदत्त चार्टर के फलस्वरूप हुआ था। इस चार्टर में कम्पनी को ईस्ट इंडीज में व्यापार करने का अधिकार दिया गया था।

ईस्ट इण्डिया की स्थापना

इंग्लैण्ड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम के समय में 31 दिसम्बर, 1600 को भारत में 'दि गर्वनर एण्ड कम्पनी ऑफ़ लन्दल ट्रेडिंग इन टू दि ईस्ट इंडीज' अर्थात् 'ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी' की स्थापना हुई थी। इस कम्पनी की स्थापना से पूर्व महारानी एलिजाबेथ ने पूर्व देशों से व्यापार करने के लिए चार्टर तथा एकाधिकार प्रदान किया। प्रारम्भ में यह अधिकार मात्र 15 वर्ष के लिए मिला था, किन्तु कालान्तर में इसे 20-20 वर्षों के लिए बढ़ाया जाने लगा। ईस्ट इंडिया कम्पनी में उस समय कुल क़रीब 217 साझीदार थे। कम्पनी का आरम्भिक उद्देश्य भू-भाग नहीं बल्कि व्यापार था।


ईस्ट इण्डिया कम्पनी मुहर

कोहिनूर हीरे की भेंट

यह भी उल्लेखनीय है कि 1850 में तत्कालीन गवर्नर-जनरल ने भारत का विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा महारानी विक्टोरियाके सामने तोहफे के तौर पर पेश किया था। बाद में इसे महारानी एलिजाबेथ प्रथम के ताज में सजा दिया गया। कोहिनूर हीरे को अंतिम बार महारानी एलिजबेथ की माँ क्वीन मदर ने पहना था। वर्ष 2002 में क्वीन मदर का निधन होने के बाद कोहिनूर को उनके ताज के साथ उनके ताबूत पर रखा गया था।

लेखिका

एलिजाबेथ प्रथम के कुशल शासन के दौरान इंग्लैण्ड ने कई अहम उपलब्धियों को हासिल किया था और यह एक वैश्विक सामाजिक शक्ति के रूप में उभरा। गौरतलब है कि एलिजाबेथ प्रथम एक अच्छी लेखिका भी थीं। उन्होंने ओजपूर्ण भाषण भी लिखे थे। उन्होंने 1558 में स्पेनी अभियान के समय अपने सैनिकों को तैयार करने के लिए भाषण भी दिया था।[1]

  • सर फ्राँसिस ड्रेक, वाइस एडमिरल (1540-27 जनवरी, 1596) महारानी एलिजाबेथ के समय का एक जहाज कप्तान, समुद्री लुटेरा, खोजी और राजनीतिज्ञ था। महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने 1581 में उसे 'नाइटहुड' प्रदान किया था।

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