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शनिवार, 10 मार्च 2018

उडुपी रामचन्द्र राव (जन्म- 10 मार्च, 1932, उडुपी

उडुपी रामचन्द्र राव (जन्म- 10 मार्च1932उडुपीभारत) एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक और 'इसरो' (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के भूतपूर्व अध्यक्ष रहे हैं। वे भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के शासी परिषद के अध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं। प्रोफ़ेसर यू.आर.राव एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अंतरिक्ष वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास और संचार तथा प्राकृतिक संसाधनों के सुदूर संवेदनों में उनके व्यापक उपयोग की दिशा में मौलिक योगदान दिया है।

जन्म तथा शिक्षा

यू.आर.राव. का जन्म 10 मार्च, 1932 में भारत के अडमारू, उडुपी में हुआ था। इन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से 1951 में विज्ञान विषय से स्नातक किया था। इसके बाद 1953 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.एस. और फिर 1960 में गुजरात विश्वविद्यालय से पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त की। तत्पश्चात् वे विदेश चले गये और एमआईटी में संकाय सदस्य और टेक्सास विश्वविद्यालय, डलास में सहायक प्रोफ़ेसर के रूप में भी कार्य किया। इसके बाद उन्होंने कई अग्रणी और अन्वेषण अंतरिक्षयानों पर प्रमुख प्रयोगकर्ता के रूप में खोज की।

भारत वापसी

प्रोफ़ेसर राव 1966 में भारत लौटे और 'भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला', अहमदाबाद में प्रोफ़ेसर का पद सँभाला। तेजी से विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की अनिवार्य आवश्यकता से आश्वस्त प्रोफ़ेसर राव ने 1972 में भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की स्थापना की जिम्मेदारी ली। उनके मार्ग-निर्देशन के तहत 1975 में प्रथम भारतीय उपग्रह 'आर्यभट्ट' से शुरुआत करते हुए संचार, सुदूर संवेदन और मौसम विज्ञान सेवाएँ प्रदान करने के लिए 18 से अधिक उपग्रह अभिकल्पित और प्रमोचित किए गए।

अध्यक्ष और सचिव का पद

1984 में अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव के रूप में पदभार सँभालने के बाद प्रोफ़ेसर राव ने रॉकेट प्रौद्योगिकी के विकास को गति दी, जिसके परिणामस्वरूप एएसएलवी रॉकेट और ध्रुवीय कक्षा में 2.0 टन वर्ग के उपग्रहों को प्रमोचित करने में सक्षम, संक्रियात्मक पीएसएलवी प्रमोचन यानों का सफल प्रमोचन क्रियान्वित हुआ। प्रोफ़ेसर राव ने 1991 में भू-स्थिर प्रमोचन यान जीएसएलवी और क्रायोजनिक प्रौद्योगिकी के विकास को प्रवर्तित किया।

रचना कार्य

प्रोफ़ेसर राव ने ब्रह्माण्डीय किरणें, अंतर-ग्रहीय भौतिकी, उच्च ऊर्जाखगोल विज्ञान, अंतरिक्ष उपयोग और उपग्रह तथा रॉकेट प्रौद्योगिकी पर 350 से अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी आलेख प्रकाशित किये है और कई पुस्तकें लिखी हैं। उन्होंने यूरोप के सबसे पुराने विश्वविद्यालय 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ बोलोग्ना' सहित लगभग 21 विश्वविद्यालयों से डी.एस.सी. (ऑनोरिस कासा) की उपाधि भी पाई है।

             10 मार्च

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