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शनिवार, 25 नवंबर 2017

25 नवम्बर (25 November) : आज का इतिहास ( Importance of the day)

25 नवम्बर
इस चिकित्सक का नाम लैवेरन था। डॉक्टर लैवेरन ने इस बीमारी के कारण का पता लगाकर इसके मुक़ाबले की भूमि समतल की। उल्लेखनीय है कि डॉक्टर लैवेरन को उनकी चिकित्सा विज्ञान संबंधी सफलताओं के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

25 नवम्बर सन 1918 ईसवी को प्रथम विश्व युद्ध और पोलैंड के अतिग्रहणकारी देशों रुस जर्मनी और ऑसट्रिया की पराजय के बाद पोलैंड दोबारा स्वंतंत्र हो गया। यह देश अतीत में कई बार दूसरे देशों के अतिग्रहण में गया और विभाजित हुआ। वर्ष 1795 ईसवी में प्रशिया रुस और ऑस्ट्रिया द्वारा इस देश का किया जाने वाला तीसरा विभाजन था। द्वितीय विश्व युद्ध में पोलैंड पुन: जर्मनी के अतिग्रहण में चला गया किंतु वर्ष 1945 में युद्ध की समाप्ति के बाद यह देश जर्मनी के अधिकार से निकल गया और चूँकि यहॉ रुस का प्रभाव अधिक था इस लिए इस देश में कम्युनिस्ट शासन लागू हो गया किंतु 1980 के दशक में सोवियत संघ के विघटन के बाद पोलैंड में कम्युनिस्ट शासन का भी सफ़ाया हो गया। पूर्वी योरोप में स्थित इस देश के पड़ोसी देश चेक स्लोवाकिया जर्मनी लिथुआनिया और यूक्रेन हैं इसका क्षेत्रफल 3 लाख 12 हज़ार 683 वर्ग किलोमीटर है।

25 नवम्बर सन 1975 ईसवी को दक्षिणी अमरीका के सूरीनाम देश को हॉलैंड से पूर्ण स्वतंत्रता मिली। सूरीनाम 16वीं शताब्दी ईसवी के आरंभ से ब्रिटेन के अधिकार में था किंतु 17वीं शताब्दी ईसवी के आरंभ में ब्रिटेन ने एक सौदे के अतर्गत सूरीनाम को हॉलैंड के हवाले कर दिया और इसके बदले उत्तरी अमरीका में हॉलैंड के कुछ उपनिवेशों को अपने नियंत्रण में कर दिया। 1954 में सूरीनाम को स्वायत्तता मिली और 1975 में आज के दिन इसे पूर्ण स्वतंत्रता मिलगई।
इसदेश में प्रजातांत्रिक व्यवस्था है। ब्राज़ील और गयाना इसके पड़ोसी देश हैं यह एटलांटिक महासागर के तट पर स्थित है।



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4 आज़र सन 1329 हिजरी शम्सी को ईरान की संसद के तेल आयोग ने ईरान और ब्रिटेन की तेल कम्पनियों की सहकारिता के समझौते को रदद कर दिया। यह समझौता उस समय हुआ था जब ईरान में तेल के राष्ट्रीय करण का अभियान व्यापक हो रहा था और इस देश के तेल स्रोतों की लूटमार के लिए अमरीका और ब्रिटेन के मध्य प्रतिस्पर्धा जारी थी। यह समझौता ईरान के तेल भंडारों के प्रयोग में ब्रिटेन की स्थिति को मज़बूत करने के लिए किया गया था जिससे ईरान के राष्ट्रीय हित खतरे में पड़ गये। यह स्थिति देखकर तत्कालीन जागरुक लोगों ने आयतुल्ला काशानी के नेतृत्व में और राष्ट्रीय सेना ने दिवंगत मुसद्दिक़ के नेतृत्व में इस समझौते के विरोध में तथा ब्रिटेन के वास्तविक लक्ष्यों से पर्दा हटाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।
अंतत: ईरानी जनता का संघर्ष रंग लाया और इसी वर्ष के अंतिम महीने में तेल उद्योग को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर दिया गया।



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6 रबीउल औवल सन 604 हिजरी क़मरी को ईरान के महान कवि व दार्शनिक जलालुद्दीन मोहम्मद बल्ख़ी का बल्ख़ नगर में जन्म हुआ जो उस समय ईरान का भाग था और अब अफ़ग़ानिस्तान का हिस्सा है। वह मौलाना और मौलवी की उपाधि से बहुत प्रसिद्ध हुए। उनके पिता बहाउद्दीन वल्द भी महान दार्शनिकों व वक्ताओं में थे। मौलाना बचपन में अपने पिता के साथ हज की यात्रा पर गए। हज के बाद वह बग़दाद और फिर वहां से क़ूनिया गए जो इस समय तुर्की में है। मौलाना ने सीरिया के हलब और दमिश्क़ शहरों में इस्लामी ज्ञाज की शिक्षा ली और फिर शिष्यों का प्रशिक्षण शुरु कर दिया। मौलाना के जीवन का निर्णायक मोड़ वर्ष 642 में महान ईरानी दार्शनिक शम्स तबरेज़ी से उनकी मुलाक़ात थी। इस मुलाक़ात के बाद उन्होंने पढ़ाना और लिखना पढ़ना छोड़कर चिंतन मनन और ईश्वर की उपासना में खुद को व्यस्त कर लिया। मौलाना की विश्व विख्यात रचनाएं इस मुलाक़ात के बाद की हैं। उनकी एक विख्यात रचना मसनविए मअनवी और दूसरी महत्वपूर्ण पुस्तक दीवाने शम्स तबरेज़ी है। इन दोनों पद्य रचनाओं के सारे ही शेर फ़ारसी भाषा में हैं । फ़ीहे मा फ़ीह, मजालिसे सबआ और मकतूबात भी मौलाना की मशहूर किताबे हैं। वर्ष 672 हिजरी क़मरी में मौलाना का निधन हो गया।


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