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शनिवार, 21 अक्तूबर 2017

शम्मी कपूर: Shammi कपूर ( अभिनेता)

शम्मी कपूर

शम्मी कपूर
Signed photo of Indian actor Shammi Kapoor (2).jpg

शम्मी कपूर (जन्म: 21 अक्टूबर, 1931 निधन: 14 अगस्त, 2011) हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। उन्होने जंगली, तुमसा नही देखा, दिल देके देखो, सिंगापुर, कॉलेज गर्ल, प्रोफेसर, चाइना टाउन, प्यार किया तो डरना क्या, कश्मीर की कली, जानवर, तीसरी मंज़िल, अंदाज़, एन इवनिंग इन पेरिस, ब्रह्मचारी और सच्चाईजैसी हिट फ़िल्मों में काम किया।

    व्यक्तिगत जीवन

    शम्मी कपूर का जन्म २१ अक्टूबर १९३१ को बंबई(प्रस्तुत मुंबई) में हुआ, इनके पिता पृथ्वीराज कपूर जाने माने अभिनेता थे[2] अभिनय इनको विरासत में मिला था। शम्मी कपूर की पहली शादी अभिनेत्री गीता बाली से हुई, लेकिन १९६५ मे चेचक की वजह से गीता की म्रत्यु हो गयी।[2] इसके पश्चात शम्मी कपूर ने नीला देवी से शादी की। १४ अगस्त २०११ की सुबह ५:१५ को इनका निधन हो गया।[3] वे ७९ वर्ष के थे।

    फिल्मी सफर

    साल 1953 में रिलीज फिल्म जीवन 'ज्योति' से बतौर अभिनेता शम्मी कपूर ने बॉलीवुड में कदम रखा। शम्मी कपूर की शुरुवाती फिल्में जीवन ज्योति, रेल का डिब्बा और गुल सनोवर थीं। शम्मी कपूर ने मुख्य अभिनेता के रूप में 50 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है और सहायक भूमिकाओं में 20 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। उन्होने फ़िल्म ब्रह्मचारी (1968) में अपने प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता है।[4]

    नामांकन और पुरस्कार

    1969 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - ब्रह्मचारी

    हिंदी फिल्मो के पहले सिंगिंग-डांसिंग स्टार शम्मी कपूर (Shammi Kapoor) रंगमंच के जाने माने अदाकार और फिल्म अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के दुसरे बेटे थे | शम्मी कपूर (Shammi Kapoor) का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को मुम्बई में हुआ था | उन्होंने वर्ष 1953 में फिल्म “जीवन ज्योति” से अपनी अभिनय पारी की शुरुवात की | वर्ष 1957 में नासिर हुसैन की फिल्म “तुमसा नही देखा” में जहा अभिनेत्री अमिता के साथ काम किया वही वर्ष 1959 में आई फिल्म “दिल दे के देखो” में आशा पारेख के साथ नजर आये |


    वर्ष 1961 में आई फिल्म “जंगली” ने उन्हें शोहरत की बुलन्दियो पर पहुचा दिया | इसके बाद हेई वह सभी प्रकार की फिल्मो में एक नृत्य कलाकार के रूप में अपने छवि बनाने में कामयाब रहे | फिल्म का गीत “याहू” दर्शको को खूब पसंद आया | उन्होंने चार फिल्मो में आशा पारेख के साथ काम किया जिसमे सबसे सफल फिल्म वर्ष 1966 में बनी “तीसरी आँख” रही | वर्ष 1960 के दशक में मध्य तक शम्मी कपूर (Shammi Kapoor) “प्रोफेसर” “चार दिल चार राहे” “रात के राही” “चाइना टाउन” “दिल तेरा दीवाना” “कश्मीर की कली” और “ब्लफमास्टर” जैसी सफल फिल्मो में दिखाई दिए |


    फिल्म ब्रह्मचारी के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरुस्कार मिला था | “भारत के एल्विस प्रेसली” कहे जाने वाले शम्मी (Shammi Kapoor) ने रुपहले पर्दे पर तक तक अपने अभिनय की शुरुवात की , जब उनके बड़े भाई राज कपूर के साथ ही देव आनन्द और दिलीप कुमार छाए हुए थे | पारिवारिक पृष्टभूमि होने के बावजूद उनकी शुरुवाती फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही | उन्होंने पचास के दशक में “डक -टेल” शैली में बाल कटवा कर “तुमसा नही देखा” के साथ खुद को नई लुक में पेश किया | उसके बाद उन्हें सफलता मिलते गयी |

    1961 में फिल्म “जंगली” की सफलता के साथ ही पूरा दशक उनकी फिल्मो के नाम रहा | दर्शको के साथ ही पूरा दशक उनकी फिल्मो के नाम रहा | दर्शको के बीच उनकी अपील “सुकू सुकू” “ओ हसीना जुल्फों वाली” “आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे” और “आ आ आजा मै हु प्यार तेरा” जैसे गानों के चलते थी जिनमे उन्होंने बड़ी ही मस्तमौला शैली में थिरकते हुए अदायगी की | हालांकि “कश्मीर की कली” “राजकुमार” “जानवर” और “एन इवनिंग इन पेरिस” जैसी कुछ फिल्मो में उनकी अभिनय क्षमता पर सवाल उठे लेकिन “जंगली” “बदतमीज” “ब्लफमास्टर” “पगला कही का” “तीसरी मंजिल” और ब्रह्मचारी की बेहतरीन सफलता के जरिये शम्मी ने अपने आलोचकों के मुह बंद कर दिए |

    उन्होंने अपनी फिल्मो में बगावती तेवर और रॉकस्टार वाली छवि से उस दौर के नायको को कई बन्धनों से अजादा किया था | हिंदी सिनेमा को यही उनकी बड़ी दें थी | वह बड़े शौकीन मिजाज के थे | तरह तरह की गाडिया चलाने का शौक वे रखते थे शाम को गोल्फ खेलना ,  समय के साथ चलना बखूबी जानते थे | फिल्मोए में वह जितने जिंदादिल किरदार निभाया करते थे उतनी ही जिन्दादिली उनके निजी जीवन में दिखती थी | उनके जीवन में कई मुश्किल दौर भी आये खासकर जब 60 के दशक में उनकी पत्नी गीता बाली का निधन हो गया | उनके कदम तब कुछ ठिठके जरुर थे पर फ़िल्मी पर्दे के रंगरेज शम्मी अपने उसी अंदाज में अभिनय से लोगो को मदमस्त करते रहते |

    बढ़ते मोटापे की कारण शम्मी कपूर (Shammi Kapoor) को बाद में फिल्मो में मुख्य भूमिकाओं से हटना पड़ा लेकिन वह चरित्र अभिनेता के रूप में फिल्मो में काम करते थे | उन्होंने मनोरंजन और बंडलबाज नामक दो फिल्मो का निर्देशन किया लेकिन ये फिल्मे नही चली | चरित्र अभिनेता के रूप में उन्हें 1982 में विधाता फिल्म के लिए श्रेष्ट सहायक अभिनेता का पुरुस्कार मिला | वह एक लोकप्रिय अभिनेता ही नही हरदिल अजीज इंसान थे | उन्होंने 14 अगस्त 2011 को मुम्बई के ब्रीज कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली |

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