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शुक्रवार, 20 अक्तूबर 2017

मेरा विद्यालय पर निबंध / A New Essay on My School in Hindi!





मेरा विद्यालय पर निबंध / A New Essay on My School in Hindi!
 ‘विद्यालय’ विद्या का मंदिर होता है। जहां विद्या की देवी ‘मां सरस्वती’ के उपासक अर्थातृ विद्यार्थी ज्ञान की प्राप्ति के लिये जाते हैं। विद्यालय वह पवित्र स्थान है जहां अबोध बच्चों को अनुशासन, सच्चरित्रता एवं सभ्य नागरिक बनने की शिक्षा दी जाती है।

essay on mera vidyalaya in hindi

हमारा विद्यालय पूरे जिले में आदर्श माना जाता है। हमारा विद्यालय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है। इसमें दसवीं कक्षा तक शिक्षा दी जाती है।
मेरे विद्यालय का परीक्षा परिणाम बहुत अच्छा जाता है। शत् प्रतिशत विद्यार्थी प्रत्येक कक्षा में उत्तीर्ण होते हैं। यह मेरे लिये विशेष प्रतिष्ठा की बात है।

हमारा विद्यालय खुले स्थान पर बना है। इसका भवन बहुत विशाल और साफ सुथरा है। इसके आस पास घने पेड़ों एवं फूलों का बगीचा है। पीछे की ओर खेलने के लिये खुला मैदान है। यहीं पर प्रातः कालीन सभा और प्रार्थना होती है।

हमारे विद्यालय में कुल पैंतीस कमरे हैं। एक विशाल सभा भवन भी बना है। कक्षा के कमरों में छात्र छात्राओं कें बैठने के लिये बढ़िया बेंच एवं अध्यापकों के बैठने के लिये मेज कुर्सियों का उचित प्रबन्ध है।

एक विशाल श्यामपट प्रत्येक कक्षा में है जिसके साथ ‘डस्टर’ एवं ‘चाक’ भी उपलब्ध कराये जाते हैं।

हमारे विद्यालय के अध्यापक एवं अध्यापिकायें अपने विषयों के विद्धान हैं। विद्यालय के प्रधानध्यापक एक सज्जन पुरूष हैं। वह हमें पितृवत स्नेह देते हैं। पर वह बहुत अनुशासन प्रिय हैं। उनके कार्यकाल में हमारे विद्यालय की प्रतिष्ठा में अत्यधिक वृद्धि हुई है।

हमारे विद्यालय में सभी तरह के खेलों, व्यायाम इत्यादि की भी उचित व्यवस्था है। मनोरंजन एवं ज्ञान बढ़ाने के लिये एक बड़ा पुस्तकालय भी है। हमारे विद्यालय के पुस्तकालय में हर विषय पर पुस्तकें हैं। खेलों और सांस्कृतिक कार्यों में हमारे विद्यालय ने कई पुरस्कार एवं ट्राफियां जीती हैं। मुझे अपने विद्यालय पर गर्व है।

 मेरे विद्यालय का नाम केंद्रीय विद्यालय ........है  । यह एक आदर्श विद्‌यालय है । यहाँ शिक्षा खेल-कूद तथा अन्य शिक्षेतर गतिविधियों की उत्तम व्यवस्था है । यहाँ का वातावरण शांत एवं मनोरम है ।

मेरे विद्‌यालय में एक से लेकर बारहवीं  कक्षा तक की पढाई होती है । प्रत्येक कक्षा में दो या तीन सेक्सन (अनुभाग) हैं । विद्‌यालय का भवन दुमंजिला है । इसमें लगभग पचास कमरे हैं । कक्षा के सभी कमरे, फर्नीचर, पंखे आदि से सुसज्जित एवं हवादार हैं । प्रधानाचार्य का कक्ष विशेष रूप से सजा हुआ है । इसके अलावा स्टाफ रूम पुस्तकालय कक्ष, हॉल, कंप्यूटर कक्ष प्रयोगशाला कक्ष आदि भी सभी प्रकार की उत्तम व्यवस्था से युक्त हैं । विद्‌यालय में पेयजल और शौचालय का भी समुचित प्रबंध है ।

मेरे विद्‌यालय में लगभग ढाई हजार विद्‌यार्थी पढ़ते हैं । अध्यापक- अध्यापिकाओं की संख्या पचास है । इनके अतिरिक्त दस अन्य स्टॉफ भी हैं । इनमें तीन क्लर्क एक माली एवं पाँच चपरासी हैं । एक दरबान है जो रात्रिकाल में विद्‌यालय की चौकीदारी करता है ।


शिक्षा के मामले में मेरा विद्‌यालय शहर में अग्रणी स्थान रखता है । प्राय : सभी विद्‌यार्थी अच्छे अंकों से पास होते हैं । शिक्षकगण विद्‌यार्थियों की प्रगति का पूरा लेखा-जोखा रखते हैं । अधिकांश शिक्षक विद्वान, अनुभवी एवं योग्य हैं । हमारी प्रधानाचार्या सुसंस्कृत एवं अनुशासनप्रिय हैं । उनके नेतृत्व में विद्‌यालय दिन-दूनी रात-चौगुनी उन्नति कर रहा है । वे विद्‌यालय के चहुंमुखी विकास के लिए कटिबद्ध दिखाई देती हैं । विद्‌यार्थी प्रधानाचार्या के प्रति बहुत आदरभाव रखते हैं ।

आजकल तकनीकी शिक्षा का महत्त्व बढ गया है । मेरे विद्‌यालय में तकनीकी शिक्षा के रूप में कंप्यूटर सिखाने पर पूरा जोर दिया जाता है । प्रयोगशाला में विज्ञान के अनुप्रयोगों को बताया जाता है । हमारे विद्‌यालय में खेल-कूद पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है । खेल प्रशिक्षक हमें क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन, खो-खो, कबड्‌डी आदि खेलों को खेलने की उचित ट्रेनिंग देते हैं । पिछले वर्ष मेरा विद्‌यालय अंतर्‌विद्‌यालय हॉकी प्रतिस्पर्धा में प्रथम स्थान पर रहा था ।

मेरे विद्‌यालय में एक अच्छा पुस्तकालय है । पुस्तकालय से विद्‌यार्थी पाठ्‌य-पुस्तकें पढ़ने के लिए ले जा सकते हैं । यहाँ पाठ्‌य-पुस्तकों के अतिरिक्त कहानियों, कविताओं तथा ज्ञान-विज्ञान से संबंधित पुस्तकों का अच्छा संग्रह है ।

मेरे विद्‌यालय के प्रांगण में अनेक पेड़-पौधे लगे हुए हैं । कतारों में लगे पेड़ों एवं फूल के पौधों से सुंदर प्राकृतिक दृश्य उत्पन्न हो जाता है । माली पेड़-पौधों की नियमित देखभाल करता है । विद्‌यालय में हमें बताया गया है कि पेड-पौधे हमारे लिए कितने महत्त्वपूर्ण हैं । इसलिए हम लोग इनकी पूरी देखभाल करते हैं ।

हमें विद्‌यालय में पढाई और खेल-कूद के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर प्राप्त होता है । छात्र-छात्राऐं बाल दिवस, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, शिक्षक दिवस, गाँधी जयंती विद्‌यालय का वार्षिकोत्सव जैसे विभिन्न अवसरों पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं । इससे हमारे अंदर ईमानदारी धैर्य साहस आपसी सहयोग जैसे गुणों का विकास होता है ।

मेरे विद्‌यालय में सब कुछ व्यवस्थित, अनुशासित, सहयोगपूर्ण एवं आमोदपूर्ण है । मुझे अपने विद्‌यालय पर गर्व का अनुभव होता है ।








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