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बुधवार, 4 अक्तूबर 2017

मिर्ज़ा ग़ालिब की हिंदी एवं उर्दू गजलें!

ख्वाहिशों का काफिला


ख्वाहिशों का काफिला भी अजीब ही है ग़ालिब 
अक्सर वहीँ से गुज़रता है जहाँ रास्ता नहीं होता
Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – Khawahishon ka qaafla bhi ajeeb hi hai Ghalib

हो चुकी ‘ग़ालिब’ बलायें सब तमाम

कोई , दिन , गैर  ज़िंदगानी और है 
अपने जी में  हमने ठानी और है .
आतशे – दोज़ख में , यह गर्मी कहाँ ,
सोज़े -गुम्हा -ऐ -निहनी और है .
बारहन उनकी देखी हैं रंजिशें ,
पर कुछ अबके सिरगिरांनी और है .
दे के खत , मुहँ देखता है नामाबर ,
कुछ तो पैगामे जुबानी और है .
हो चुकी ‘ग़ालिब’, बलायें सब  तमाम ,
एक मरगे -नागहानी और है .
Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – Ho chuki ‘Ghalib’, balayen sub tamam

‘ ग़ालिब ‘ कौन है

पूछते हैं वो की ‘ग़ालिब ‘ कौन है ?
कोई बतलाओ की हम बतलायें क्या
Urdu and hindi shayari – Galib – Mirza Galib ki shayari – Galib kaun hai

तग़ाफ़ुल-ऐ-ग़ालिब

करने गए थे उस से तग़ाफ़ुल का हम गिला 
बस एक ही निगाह की बस ख़ाक हो गए
Urdu and hindi shayari – तग़ाफ़ुल-ऐ-ग़ालिब – Mirza Galib ki shayari – karane gaye the us se tagaaful

शब -ऐ -महताब

ग़ालिब” छूटी शराब पर अब भी कभी कभी ,
पीता हूँ रोज़ -ऐ -अबरो शब -ऐ -महताब में
Urdu and hindi shayari – Mirza Galib ki shayari – Peeta hun roz-e-Abro shab-e-Mahtaab mein

आरज़ू

रही न ताक़त -ऐ -गुफ्तार और अगर हो भी ,
तो किस उम्मीद पे कहिये के आरज़ू क्या है ..
Urdu and hindi shayari –ae-Galib – Mirza Galib ki shayari – Rahi na taaqat-e-guftaar

खमा -ऐ -ग़ालिब

बहुत सही गम -ऐ -गति शराब कम क्या है 
गुलाम -ऐ-साक़ी -ऐ -कौसर हूँ मुझको गम क्या है 
तुम्हारी तर्ज़ -ओ -रवीश जानते हैं हम क्या है 
रक़ीब पर है अगर लुत्फ़ तो सितम क्या है 
सुख में खमा -ऐ -ग़ालिब की आतशफशनि 
यकीन है हमको भी लेकिन अब उस में दम क्या है
Urdu and hindi shayari – khama-e-Galib – Mirza Galib ki shayari – bahot sahi gam-e-geti sharab kam kya hai

दरो -ओ -दीवार – Mirza Galib

रात है ,सनाटा है , वहां कोई न होगा, ग़ालिब
चलो उन के दरो -ओ -दीवार चूम के आते हैं
Urdu and hindi shayari – daar-o-deewar – Mirza Galib ki shayari – Daro-o-Dewar Galib

कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद

तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत नहीं है ग़ालिब 
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद
Urdu and hindi shayari – Husn – Mirza Galib ki shayari – Tere Husn Ko Parde Ki Zaroorat Nahi Hai Ghalib

क्या बने बात  – Mirza Galib

नुक्ता चीन है , गम -ऐ -दिल उस को सुनाये न बने
क्या बने बात , जहाँ बात बनाये न बने
मैं बुलाता तो हूँ उस को , मगर ऐ जज़्बा -ऐ -दिल 
उस पे बन जाये कुछ ऐसी , के बिन आये न बने
खेल समझा है , कहीं छोड़ न दे , भूल न जाये 
काश ! यूँ भी हो के बिन मेरे सताए न बने
खेल समझा है , कहीं छोड़ न दे , भूल न जाये 
काश ! यूँ भी हो के बिन मेरे सताए न बने
ग़ैर फिरता है लिए यूँ तेरे खत को कह अगर 
कोई पूछे के ये क्या है , तो छुपाये न बने
इस नज़ाकत का बुरा हो , वो भले हैं , तो किया 
हाथ आएं , तो उन्हें हाथ लगाये न बने
कह सकेगा कौन , ये जलवा गारी किस की है 
पर्दा छोड़ा है वो उस ने के उठाये न बने
मौत की रह न देखूं ? के बिन आये न रहे 
तुम को चाहूँ ? के न आओ , तो बुलाये न बने
इश्क़ पर ज़ोर नहीं , है ये वो आतिश ग़ालिब 
के लगाये न लगे , और बुझाए न बने
Urdu and hindi shayari – Mirza Galib ki shayari – Nukta cheen hai, ghum-e-dil us ko sunaye na bane

वफ़ा के ज़िक्र में ग़ालिब मुझे गुमाँ हुआ 
वो दर्द इश्क़ वफाओं को खो चूका होगा ,
जो मेरे साथ मोहब्बत में हद -ऐ -जूनून तक था 
वो खुद को वक़्त के पानी से धो चूका होगा ,
मेरी आवाज़ को जो साज़ कहा करता था 
मेरी आहोँ को याद कर के सो चूका होगा ,
वो मेरा प्यार , तलब और मेरा चैन -ओ -क़रार 
जफ़ा की हद में ज़माने का हो चूका होगा ,
तुम उसकी राह न देखो वो ग़ैर था साक़ी 
भुला दो उसको वो ग़ैरों का हो चूका होगा !
Urdu and hindi shayari – Mirza Galib ki shayari – wafa ke zikar mein ghalib mujhe gumaan hua

निकलना खुद से आदम का सुनते आये हैं लकिन
बहुत बेआबरू हो कर तेरे कूचे से हम निकले
Urdu and hindi shayari – Mirza Galib ki shayari – bahut bayabroo ho kar teray kochay say hum niklay

उग रहा है दर-ओ -दीवार पे सब्ज़ा “ग़ालिब “
हम बयाबान में हैं और घर में बहार आई है ..

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