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मंगलवार, 12 सितंबर 2017

रेलवे सिस्टम पर लघु कविता!

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साथियो रेलवे में 10 साल नोकरी
करने पर अब मन हुआ गम्भीर।
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इस रेलवे में कर्मचरियों की
क्यूँ अलग - अलग तकदीर।।
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किसी को बिन माँगे मोती
किसी की सुनवाई नही होती।
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रेलपथ वालो से लहराती है।✍,
स्वार्थी संगठनों की हरी भरी खेती।
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क्या सोच के सिस्टम ने ✍✍
बनाई ये दो वैरंग तस्वीर ।✍
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एक ही परीक्षा पास करने
वालो की क्यूँ लिखी अलग
अलग तकदीर।✍✍✍
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कुछ किस्मत वाले PP बन कर
टाई कोट का सुख अमृत पीते है।
कुछ ट्रैकमैन दिल पर रख कर
पत्थर जीवन अपना जीते है।
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तपती दोपहरी में काम करें
फिर भी अपमानित से जीते है।
ट्रैफिक और कॉमर्शियल वालो
के मन का पंछी आकाश उड़े✍
20 किलोमीटर तक रोज चलने
की जंजीर ट्रैकमैन के क्यो पाँव पड़े।।✍
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✍✍✍ ✍ ✍✍✍
रेलवे सिस्टम ने ट्रैकमेन्टेनर की
तकदीर भी क्या खूब लिखी है।
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एक ही परीक्षा  पास करने के
बाद भी किसी  को TC,CCऔर
ASM बनने की जिंदगी दी न्यारी
            🔨 और🔨
ट्रैकमैन ने क्या बिगाड़ा था जो
मिला विटर पंजा ,बारी तगाड़ी।
🔩🔨🔩🔨🔩🔨
तुलना उस पत्थर से जो ठोकर
खाएं,उसी पत्थर का दूसरा
टुकड़ा मन्दिर में बैठा रोज पूजा
जाएं।
एक कागज रद्दी और दूसरा
कागज गीता और कुरान बन

जाये।
📝📝📝📝📝📝📝📝📝

माना के किस्मत पे ट्रैकमैन
कोई ज़ोर नही….
पर ये सच ह की ट्रैकमैन की
मेहनत किसी से कमज़ोर नही,

देख कर ट्रैक के काम
की अधिकता हम कभी
घबराएं नहीं ।


लग रहा है विचित्र सा हर एक पल
लेकिन हमारी एकता हो रही है सफल
WRTA जिन्दावाद जिन्दावाद
             

 भेजने वाले का नाम 🌷चेतराम जोरवाड़🌷
               🌷भरुच वड़ोदरा🌷
शुक्रिया चेतराम जी !by-kvskidszone.blogspot.com

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