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शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

साथी हाथ बढानाकक्षा-६

साथी हाथ बढानाकक्षा-६ 
  1. यह गीत किसको संबोधित है?
उत्तर:- 
यह गीत मजदूरों को संबोधित है।

2. इस गीत की किन पंक्तियों को तुम अपने आसपास की ज़िंदगी में घटते हुए देख सकते हो?
उत्तर:- 
साथी हाथ बढाना
एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना
साथी हाथ बढाना।
हम मेहनत वालों ने जब भी, मिलकर -कदम बढाया
सागर ने रस्ता छोडा, परबत ने सीस झुकाया
फौलादी हैं सीने अपने, फौलादी हैं बाँहें
हम चाहें तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें
उपर्युक्त पंक्तियों को हम अपने आसपास के श्रमिक वर्ग की ज़िंदगी में घटते हुए देख सकते हैं। गीत की इन पंक्तियों में कवि बताते है कि अकेला व्यक्ति अगर कुछ पाने का प्रयास करे तो थक जाता है परंतु अगर सब मिल-जुलकर के कार्य करे तो बड़े से बड़े लक्ष्य तक आसानी से पहुँच सकते हैं।

3. ‘सागर ने रस्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया’ – साहिर ने ऐसा क्यों कहा है? लिखो।
उत्तर:- 
‘सागर ने रस्ता छोडा, परबत ने सीस झुकाया’ – इन पंक्तियों द्वारा साहिर जी ने मनुष्य के साहस और हिम्मत को दर्शाया हैं। यदि मेहनत करने वाले मिलकर कदम बढ़ाते हैं तो समुद्र भी उनके लिए रास्ता छोड़ देता है, पर्वत भी उनके समक्ष झुक जाते हैं अर्थात् आने वाली बाधाएँ स्वयं ही टल जाती हैं। इसी हिम्मत के कारण मनुष्य पर्वत को काटकर मार्ग बना पाया, सागर में पुलों का निर्माण कर पाया, चाँद तक पहुँच गया।

4. गीत में सीने और बाँह को फ़ौलादी क्यों कहा गया है?
उत्तर:- 
मजबूत इच्छाशक्ति के लिए मजबूत सीना आवश्यक है और इन कार्यों को पूरा करने के लिए मजबूत हाथ आवश्यक है। इसलिए कवि ने इस गीत में मजदूर के सीने और बाँह को फ़ौलादी कहा है।

5. ‘एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना’ –
(क) तुम अपने घर में इस बात का ध्यान कैसे रख सकते हो?
(ख) पापा के काम और माँ के काम क्या-क्या हैं?
(ग) क्या वे एक-दूसरे का हाथ बँटाते हैं?
उत्तर:- 
(क) हम घर के काम में सहभागी बनकर इस बात का ध्यान रख सकते है।
(ख) पापा का काम पैसे कमाना व बाहर से चीजें लाना, बिल भरना आदि है। माँ का काम घर की सफाई करना, खाना बनाना आदि है।
(ग) हाँ, वे एक एक-दूसरे का हाथ बँटाते हैं।

• भाषा की बात
6. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।
एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं।
(क) ऊपर लिखी कहावतों का अर्थ गीत की किन पंक्तियों से मिलता-जुलता है?
उत्तर:- 
(क) ऊपर लिखी कहावतों का अर्थ गीत की निम्न पंक्तियों से मिलता-जुलता है?
साथी हाथ बढाना
एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना
साथी हाथ बढाना।
हम मेहनत वालों ने जब भी, मिलकर कदम बढाया
सागर ने रस्ता छोडा, परबत ने सीस झुकाया
फौलादी हैं सीने अपने, फौलादी हैं बाँहें
हम चाहें तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें
साथी हाथ बढाना।
(ख) इन दोनों कहावतों का अर्थ कहावत-कोश में देखकर समझो और वाक्य के संदर्भ में उनका प्रयोग करो।
उत्तर:- 
(ख)
मुहावराअर्थवाक्य
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकतामिलजुलकर काम करने से जीवन में प्रगति संभव है।किसी ने सच ही कहा है, अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता
एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैंसंगठन में शक्ति होती है।यदि हम मिलकर इस योजना पर काम करें तो यह निश्चित ही पूरा होगा क्योंकि एक और एक मिलकर ही तो ग्यारह होते हैं

7. नीचे हाथ से संबंधित कुछ मुहावरे दिए हैं। इनके अर्थ समझो और प्रत्येक मुहावरे से वाक्य बनाओ –
(क) हाथ को हाथ न सूझना
(ख) हाथ साफ़ करना
(ग) हाथ-पैर फूलना
(घ) हाथों-हाथ लेना
(ड) हाथ लगना
उत्तर:- 
(क) हाथ को हाथ न सूझना (अंधेरा होना) – गाँव के रास्तों पर आज भी बिजली की समस्या है, रात को बाहर निकलो तो हाथ को हाथ न सूझे।
(ख) हाथ साफ़ करना (चोरी करना) – शादी वाले घर में सतर्क रहना जरूरी है वरना कोई भी भी हाथ साफ़ कर सकता हैं।
(ग) हाथ-पैर फूलना (डर से घबरा जाना) – सड़क पर चलते-चलते अचानक साँप को देखा तो रामू के हाथ-पैर फूल गए।
(घ) हाथों-हाथ लेना (स्वागत करना) – बेटे के विलायत से लौटने पर माँ-पिताजी ने उसे हाथों-हाथ लिया।
(ड) हाथ लगना (अचानक मिल जाना) मंदिर जाते वक्त चलते-चलते ५०० की नोट मेरे हाथ लग गई।

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