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शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

पाठ-11 जो देखकर भी नही देखते

पाठ-11 जो देखकर भी नही देखते

1. ‘जिन लोगों के पास आँखें हैं, वे सचमुच बहुत कम देखते हैं’ – हेलेन केलर को ऐसा क्यों लगता था?
उत्तर:- 
एक बार हेलेन केलर की प्रिय मित्र जंगल में घूमने गई थी। जब वह वापस लौटी तो हेलेन केलर ने उससे जंगल के बारे में जानना चाहा तो उसकी मित्र ने जवाब दिया कि कुछ खास नहीं तब उस समय हेलेन केलर को लगा कि सचमुच जिनके पास आँखें होती है वे बहुत ही कम देखते हैं।

2. ‘प्रकृति का जादू’ किसे कहा गया है?
उत्तर:- 
प्रकृति के अनमोल खजाने को, उसके अनमोल सौंदर्य और उसमें होने वाले नित्य-प्रतिदिन बदलाव को ‘प्रकृति का जादू’ कहा गया है।

3. ‘कुछ खास तो नहीं’- हेलेन की मित्र ने यह जवाब किस मौके पर दिया और यह सुनकर हेलेन को आश्चर्य क्यों हुआ?
उत्तर:- 
एक बार हेलेन केलर की प्रिय मित्र जंगल में घूमने गई थी।जब वह वापस लौटी तो हेलेन केलर ने उससे जंगल के बारे में जानना चाहा तब उसकी मित्र ने जवाब दिया कि कुछ खास नहीं।
यह सुनकर हेलेन केलर को बड़ा आश्चर्य हुआ कि लोग कैसे आँखें होकर भी नहीं देखते हैं क्योंकि वे तो आँखें न होने के बावजूद भी प्रकृति की बहुत सारी चीज़ों को केवल स्पर्श से ही महसूस कर लेती हैं।

4. हेलेन केलर प्रकृति की किन चीज़ों को छूकर और सुनकर पहचान लेती थीं? पाठ पढ़कर इसका उत्तर लिखो।
उत्तर:- 
हेलन केलर भोज-पत्र के पेड़ की चिकनी छाल और चीड की खुरदरी छाल को स्पर्श से पहचान लेती थी। वसंत के दौरान वे टहनियों में नयी कलियाँ, फूलों की पंखुडियों की मखमली सतह और उनकी घुमावदार बनावट को भी वे छूकर पहचान लेती थीं। चिडिया के मधुर स्वर को वे सुनकर जान लेती थीं।

5. ‘जबकि इस नियामत से ज़िंदगी को खुशियों के इन्द्रधनुषी रंगों से हरा-भरा जा सकता है।’ – तुम्हारी नज़र में इसका क्या अर्थ हो सकता है?
उत्तर:- 
दृष्टि हमारे शरीर का कोई साधारण अंग नहीं है बल्कि यह तो ईश्वर प्रदत्त नियामत है। इसके जरिए हम प्रकृति निर्मित और मानव निर्मित हर एक वस्तु का आनंद उठा सकते हैं। ईश्वर के इस अनमोल तोहफ़े से हम अपना जीवन खुशियों से भर सकते हैं। अत: हमें ईश्वर का शुक्रगुजार होते हुए इसकी कद्र भी करनी चाहिए।

6. आज तुमने अपने घर से आते हुए बारीकी से क्या-क्या देखा-सुना? मित्रों के साथ सामूहिक चर्चा कीजिए।
उत्तर:- 
रोज की तरह आज भी मैं पैदल ही अपने घर जा रही थी। विद्यालय के फाटक से बाहर निकलते ही मुझे बाहर बैठने वाले खोमचें वालों की बच्चों को अपने सामान की ओर आकर्षित करने वाली आवाज़ें सुनाईं पड़ीं। आगे बढ़ने पर रास्ते पर कार, साइकिलें, रिक्शा बस की एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ दिखाई पड़ी। उनसे बचकर जब मैं आगे मुड़कर मेरे घर की ओर जाने वाली शांत सड़क पर निकली तो मुझे सड़क के दोनों ओर लगे गुलमोहर, अशोक और आम के पेड़ों के झूमने से ठंडी हवाओं का स्पर्श महसूस हुआ। इन्हीं पेड़ों पर कुछ नन्हीं गिलहरियाँ भी रहती हैं जो सर्र से नीचे-ऊपर कर रही थी। थोड़े समय तक में इनकी इस क्रीड़ा में खो सी गई परन्तु फिर माँ का ध्यान आते ही मैं दौड़कर घर की ओर चल पड़ी।

7. कान से न सुनने पर आस पास की दुनिया कैसी लगती होगी? इस पर टिप्पणी लिखो और साथियों के साथ विचार करो।
उत्तर:- 
ईश्वर प्रदत्त शारीरिक अंगों में कान भी शरीर का एक महत्त्वपूर्ण अंग हैं। इसके काम न करने पर हमें बाहरी दुनिया बड़ी ही अजीब सी लगती होगी। हमारे लिए विचारों का आदान-प्रदान करना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि हम न तो किसी की बात समझ पाएँगें और ना ही किसी को अपनी बात समझा पाएँगें।

8. कई चीज़ों को छूकर ही पता चलता है, जैसे – कपड़े की चिकनाहट या खुरदरापन, पत्तियों की नसों का उभार आदि। ऐसी और चीज़ों की सूची तैयार करो जिनको छूने से उनकी खासियत का पता चलता है।
उत्तर:- 
अखरोट का खुरदुरापन, फूलों को छूने से उनका मखमली अहसास, घास को छूने से होने वाला नरम अहसास।

9. हम अपनी पाँचों इंद्रियों में से आँखों का इस्तेमाल सबसे ज्य़ादा करते हैं। ऐसी चीज़ों के अहसासों की तालिका बनाओ जो तुम बाकी चार इंद्रियों से महसूस करते हो –
सुनना, चखना, सूँघना, छूना।
उत्तर:-
सुनना (कान)चखना (जीभ)सूँघना (नाक)छूना (त्वचा)
कर्कश ध्वनियाँ – कुछ पशु-प्राणियों की आवाज़ेंमिठास-फल, मिठाईसुगंध – इत्र, फूलों की खुशबू, खाद्य पदार्थगर्म – दूध, चाय या अन्य पेय पदार्थ
मधुर-ध्वनियाँ -कोयल की बोली, पक्षियों की चहचहाट, गीत और संगीत के मधुर स्वरकटु स्वाद – करेला, दवाईंयाँदुर्गंध – गंदा नालाठंडा – बर्फ, शरबत
तीखा, नमकीन स्वाद – मिर्च, नमक, सब्जीमुलायम – फूलों की पंखुड़ियाँ

10. तुम्हें किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का मौका मिले जिसे दिखाई न देता हो तो तुम उससे प्रकृति के उसके अनुभवों के बारे में क्या-क्या पूछना चाहोगे और क्यों?
उत्तर:- 
मुझे यदि किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का मौका मिले तो मैं उससे यही जानना चाहूँगा कि वे किस प्रकार से दिन और रात का आभास करते हैं? प्रकृति और रंगों के बारे में उनकी कल्पना कैसी होती है? जब वे किसी वस्तु को छूते हैं तो वे किस प्रकार से उसकी आकृति बनाते हैं?

• भाषा की बात
11 .पाठ में स्पर्श से संबंधित कई शब्द आए हैं। नीचे ऐसे कुछ और शब्द दिए गए हैं। बताओ कि किन चीज़ों का स्पर्श ऐसा होता है –
चिकना, चिपचिपा, मुलायम, खुरदरा, लिजलिजा, ऊबड़-खाबड़, सख्त, भुरभुरा।
उत्तर:- 
चिकना – घी
चिपचिपा – गोंद
मुलायम – रेशमी कपड़ा
खुरदरा – कपड़ा
लिजलिजा – शहद
ऊबड़-खाबड़ – पेड़ का तना
सख्त – पत्थर
भुरभुरा – रेत

12. अगर मुझे इन चीज़ों को छूने भर से इतनी खुशी मिलती है, तो उनकी सुंदरता देखकर तो मेरा मन मुग्ध ही हो जाएगा।
रेखांकित संज्ञाएँ क्रमश: किसी भाव और किसी की विशेषता के बारे में बता रही हैं। ऐसी संज्ञाएँ भाववाचक कहलाती हैं। गुण और भाव के अलावा भाववाचक संज्ञाओं का संबंध किसी की दशा और किसी कार्य से भी होता है। भाववाचक संज्ञा की पहचान यह है कि इससे जुड़े शब्दों को हम सिर्फ़ महसूस कर सकते हैं, देख या छू नहीं सकते। नीचे लिखी भाववाचक संज्ञाओं को पढ़ों और समझो। इनमें से कुछ शब्द संज्ञा और कुछ क्रिया से बने हैं। उन्हें भी पहचानकर लिखो –
मिठास, भूख, शांति, भोलापन, बुढ़ापा, घबराहट, बहाव, फुर्ती, ताजगी, क्रोध, मज़दूरी।
उत्तर:-
क्रिया से बनी भाववाचक संज्ञाविशेषण से बनी भाववाचक संज्ञाजातिवाचक संज्ञा से बनी भाव वाचक संज्ञाभाववाचक संज्ञा
घबराना से घबराहटबूढ़ा से बुढ़ापामजदूर से मजदूरीक्रोध और फुर्ती शब्द भाववाचक संज्ञा शब्द हैं।
बहाना से बहावताजा से ताजगी
भूखा से भूख
शांत से शांति
मीठा से मिठास
भोला से भोलापन

13. मैं अब इस तरह के उत्तरों की आदी हो चुकी हूँ।
उस बगीचे में अमलतास, सेमल, कजरी आदि तरह-तरह के पेड़ थे।
ऊपर लिखे वाक्यों में रेखांकित शब्द देखने में मिलते-जुलते हैं, पर उनके अर्थ भिन्न हैं। नीचे ऐसे कुछ और समरूपी शब्द दिए गए हैं। वाक्य बनाकर उनका अर्थ स्पष्ट करो –
अवधि – अवधी, में – मैं, मेल – मैला, ओर – और, दिन – दीन, सिल – सील।
उत्तर:-
अवधि – दो सप्ताह की अवधि इतने बड़े कार्यक्रम के लिए कम है।
अवधी – कवि तुलसीदास अपनी रचना अवधी में करते थे।
में – कटोरी में खीर है।
मैं – मैं तो आज मेले जा रहा हूँ।
मेल – इस गाँव के किसानों में बड़ा मेल है।
मैला – यह कपड़ा कितना मैला है।
ओर – नदी के दोनों ओर हरे-भरे वृक्ष लहरा रहे थे।
और – नीरज और नीरव सगे भाई हैं।
दिन – इस कार्य को तुम दिन में ही समाप्त कर लेना।
दीन – दीन व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए।
सिल – सिल पर पीसे मसालों का स्वाद बढ़िया होता है।
सील – इस लिफ़ाफे की सील खोल दो।

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