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शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

पाठ-09 टिकट एलबम

पाठ-09 टिकट एलबम


1. नागराजन ने अलबम के मुख्य पृष्ठ पर क्या लिखा और क्यों? इसका असर कक्षा के दूसरे लड़के-लड़कियों पर क्या हुआ?
उत्तर:- 
अलबम के पहले पृष्ठ पर मोती जैसे अक्षरों में उसके मामा ने लिख भेजा था –
ए. एम. नागराजन
‘इस अलबम को चुराने वाला बेशर्म है। ऊपर लिखें नाम को कभी देखा है? यह अलबम मेरा है। जब तक घास हरी है और कमल लाल, सूरज जब तक पूर्व से उगे और पश्चिम में छिपे,उस अनंत काल तक के लिए यह अलबम मेरा है, रहेगा।’
ऐसा करने से अलबम कोई नहीं चुराएगा। इसके असर से क्लास के सारे लड़के-लड़कियों ने यह वाक्य अपने-अपने अलबम व किताबों में लिख लिया।

2. नागराजन के अलबम के हिट हो जाने के बाद राजप्पा के मन की क्या दशा हुई?
उत्तर:- 
नागराजन के अलबम के हिट हो जाने के बाद राजप्पा मन ही मन कुढ़ा करता था। उसे अब स्कूल जाना भी अच्छा नहीं लगता था उसे जलन हो रही थी।

3. अलबम चुराते समय राजप्पा किस मानसिक स्थिति से गुज़र रहा था?
उत्तर:- 
अलबम का पहला पृष्ठ पढ़कर उसका दिल तेजी से धडकने लगा। अलबम चुराते समय राजप्पा का पूरा शरीर जैसे जल रहा था। गला सूख रहा था और चेहरा तमतमाने लगा था। इस प्रकार राजप्पा ने अलबम चुरा तो लिया परंतु उसे बहुत ही दुखद मानसिक स्थिति का सामना करना पड़ा क्योंकि उसे पता था उसने गलत किया है।

4. राजप्पा ने नागराजन का टिकट-अलबम अँगीठी में क्यों डाल दिया?
उत्तर:- 
अपनी चोरी पकड़े जाने के डर के मारे राजप्पा ने नागराजन का टिकट-अलबम अँगीठी में डाल दिया।

5. लेखक ने राजप्पा के टिकट इकट्ठा करने की तुलना मधुमक्सी से क्यों की?
उत्तर:- 
लेखक ने राजप्पा के टिकट इकट्ठा करने की तुलना मधुमक्सी की है क्योंकि मधुमक्खी विभिन्न फूलों से रस इकट्ठा करती है उसी प्रकार राज्प्पा ने भी विभिन्न स्थानों और व्यक्तियों से टिकट इकट्ठा कर अपना अलबम तैयार किया है।

6. टिकटों की तरह ही बच्चे और बड़े दूसरी चीज़ें भी जमा करते हैं। सिक्के उनमें से एक हैं। तुम कुछ अन्य चीज़ों के बारे में सोचो जिन्हें जमा किया जा सकता है। उनके नाम लिखो।
उत्तर:- 
टिकटों की तरह ही बच्चे और बड़े दूसरी चीजें भी जमा करते हैं जैसे –
1. शंख या सीपें
2. पुराने सिक्के
3. दूसरे देशों के रूपए आदि।

7. टिकट-अलबम का शौक रखने के राजप्पा और नागराजन के तरीके में क्या फ़र्क है? तुम अपने शौक के लिए कौन-सा तरीका अपनाओगे?
उत्तर:- 
मधुमक्खी विभिन्न फूलों से रस इकट्ठा करती है उसी प्रकार राजप्पा ने भी विभिन्न स्थानों और व्यक्तियों से टिकट इकट्ठा कर अपना अलबम तैयार किया और नागराजन को उसके मामा ने बना-बनाया अलबम भेज दिया था।
मैं अपना शौक पूरा करने के लिए राजप्पा का तरीका अपनाउँगा क्योंकि अपनी मेहनत से प्राप्त की हुई वस्तु का गर्व और आनंद अलग ही होता है।

8. इकट्ठा किए हुए टिकटों का अलग-अलग तरह से वर्गीकरण किया जा सकता है, जैसे – देश के आधार पर। ऐसे और आधार सोचकर लिखो।
उत्तर:- 
इकट्ठा किए हुए टिकटों का अलग-अलग तरह से वर्गीकरण किया जा सकता है, जैसे – देश के आधार पर, मूल्य के आधार पर, काल के आधार पर, रंग के आधार पर आदि।

9. राजप्पा अलबम के जलाए जाने की बात नागराजन को क्यों नहीं कह पाता है? अगर वह कह देता तो क्या कहानी के अंत पर कुछ फ़र्क पड़ता? कैसे?
उत्तर:- 
राजप्पा अलबम के जलाए जाने की बात नागराजन को नहीं कह पाता क्योंकि इससे उसका विश्वास टूट जाता। अगर कह देता तो उसे सब भला-बुरा कहते और नागराजन उससे लड़ भी सकता था।

• कुछ और प्रश्न
10. ‘ऑस्ट्रेलिया के दो टिकटों के बदले फिनलैंड का एक टिकट लेता। दो पाकिस्तान के बदले एक रूस का।’ वह ऐसा क्यों करता था?
उत्तर:- 
उसे अलग-अलग देश के टिकट जमा करने होगे और उस देश के टिकट मुश्किल से मिलने पर वह ऐसा करता होगा।

• भाषा की बात
11. निम्नलिखित शब्दों को कहानी में ढूँढ़कर उनका अर्थ समझो। अब स्वयं सोचकर इनसे वाक्य बनाओ –
खोंसना जमघट टटोलना
कुढ़ना अगुआ पुचकारना
खलना हेकड़ी
उत्तर:- 
1) खोंसना (अटकाना) – रामन ने पेंसिल को अपने बालों में खोंस दिया।
2) जमघट (भीड़) – मेले में बच्चों का जमघट लगा हुआ था।
3) टटोलना (ढूँढना) – चाबी माँगने पर वह ज़ेब टटोलने लगा।
4) कुढ़ना (ईर्ष्या करना, जलना) – मीरा की उन्नति देखकर सीमा उससे कुढ़ने लगी।
5) अगुआ (नेता, मुखिया, आगे चलने वाला) – सोहन सारे खिलाड़ियों का अगुआ बनकर चल रहा था।
6) पुचकारना (सांत्वना देना) – छोटे बच्चों को रोते देखकर उन्हें पुचकारने को मन करता है।
7) खलना (बुरा लगना) – वह अपने गुस्से के कारण सबको खलने लगा।
8) हेकड़ी (डींग मारना) – तुम तुम्हारी अमीरी की हेकड़ी यहाँ मत दिखाओ।

12. कहानी से व्यक्तियों या वस्तुओं के लिए प्रयुक्त हुए ‘नहीं’ अर्थ देने वाले शब्दों (नकारात्मक विशेषण) को छाँटकर लिखो। उनका उलटा अर्थ देने वाले शब्द भी लिखो।
उत्तर:-
नकारात्मक विशेषणविपरीतार्थक विशेषण
बंदखुला
घमंडीस्वाभिमानी
चिंतितनिश्चिंत
ईर्ष्यालुस्पर्धालु
फिसड्डीबढ़िया

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