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रविवार, 30 जुलाई 2017

08 हज़ारीप्रसाद द्रिवेदी

1. गुरुदेव ने शांतिनिकेतन को छोड़ कहीं ओर रहने का मन क्यों बनाया ?
उत्तर:- 
गुरुदेव ने निम्नलिखित कारणों से शांतिनिकेतन को छोड़कर अन्यत्र रहने का मन बनाया –
1. उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं था ।
2. उन्हें आराम और शांति चाहिए थी, मिलने वाले लोगो की वजह से जो सम्भव नहीं हो रहा था।

2. मूक प्राणी भी मनुष्य से कम संवेदनशील नहीं होते पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:- 
मूक प्राणी भी कम संवेदनशील नहीं होते हैं, उन्हें भी स्नेह की अनुभूति होती है। पाठ में रविन्द्रनाथ जी के कुत्ते के कुछ प्रसंगों से यह बात स्पष्ट हो जाती है –
1. गुरुदेव के स्पर्श को कुत्ता आँखें बंद करके अनुभव करता है, तब ऐसा लगता है मानों उसके अतृप्त मन को उस स्पर्श ने तृप्ति मिल गई हो।
2. गुरुदेव की मृत्यु के उपरांत कुत्ता अस्थिकलश के पास कुछ देर तक उदास बैठा रहता है। वह भी अन्य लोगों की तरह शोक प्रकट करता है ।

3. गुरुदेव द्वारा मैना को लक्ष्य करके लिखी कविता के मर्म को लेखक कब समझ पाया ?
उत्तर:- 
गुरुदेव द्वारा मैना को लक्ष्य करके लिखी कविता के मर्म को लेखक तब समझ पाए जब रविन्द्रनाथ के कहने पर लेखक ने मैना को ध्यानपूर्वक देखा।

4. प्रस्तुत पाठ एक निबंध है। निबंध गद्य-साहित्य की उत्कृष्ट विधा है, जिसमें लेखक अपने भावों और विचारों को कलात्मक और लालित्यपूर्ण शैली में अभिव्यक्त करता है। इस निबंध में उपर्युक्त विशेषताएँ कहाँ झलकती हैं ? किन्हीं चार का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:- 
लेखक ने अपने भाव और विचारों को कलात्मक एवं लालित्यपूर्ण शैली में अभिव्यक्त किया है। इस विशेषता को निम्नलिखित स्थानों पर देखा जा सकता है –
1. आश्रम के अधिकांश लोग बाहर चले गए, एक दिन हमने सपरिवार उनके ‘दर्शन’ की ठानी।
2. यहाँ दुख के साथ सुख देना चाहता हूँ कि दर्शनार्थियों में कितने ही इतने प्रगल्भ थे कि समय-असमय, स्थान-अस्थान, अवस्था-अनवस्था की एकदम परवा नहीं करते और रोकते रहने पर भी आ ही जाते थे। ऐसे दर्शनार्थियों से गुरुदेव भीत-भीत रहते थे। अस्तु, मैं मय बाल-बच्चों के एक दिन श्री निकेतन जा पहुँचा।
3. उस समय लँगड़ी मैना फुदक रही थी। गुरुदेव ने कहा ”देखते हो, यह यूथभ्रष्ट है। रोज फुदकती है, ठीक यही आकर मुझे इसकी चाल में एक करुण भाव दिखाई देता है।”
4. पक्षियों की भाषा तो मैं नहीं जानता, पर मेरा निश्चित विश्वास है कि उनमेँ कुछ इस तरह कि बातें हो जाया जरती हैं –
पत्नी – ये लोग यहाँ कैसे आ गए जी ?
पति – ऊँह बेचारे आ गए हैं, तो रह जाने दो। क्या कर लेंगे।
पत्नी – लेकिन फिर इनको इतना तो ख्याल होनाचाहिए कि यह हमारा प्राइवेट घर है।
पति – आदमी जो हैं, इतनी अक्ल कहाँ।
5. प्रतिदिन प्रातः काल यह भक्त कुत्ता स्तब्ध होकर आसन के पास तब तक बैठा रहता है, जब तक अपने हाथों के स्पर्श से मैं इसका संग स्वीकार नहीं करता। इतनी सी स्वीकृति पाकर ही उसके अंग-अंग में आनंद का प्रवाह बह उठता है।

5. आशय स्पष्ट कीजिए- इस प्रकार कवि की मर्मभेदी दृष्टि ने इस भाषाहीन प्राणी की करूण दृष्टि के भीतर उस विशाल मानव-सत्य को देखा है, जो मनुष्य के अंदर भी नहीं देख पता।
उत्तर:- 
आशय –
कवि कहते है – गुरुदेव के स्पर्श को कुत्ता आँखें बंद करके अनुभव करता है, तब ऐसा लगता है मानों उसके अतृप्त मन को उस स्पर्श ने तृप्ति मिल गई हो। आज मनुष्य पहले कि अपेक्षा अधिक आत्मकेंद्रित हो गया है। आज मनुष्य, मनुष्य के भाव को नहीं समझ पाता है। ऐसे में कवि ने एक मूक पशु की भावनाओं का अनुभव कर लिया।

6. पशु-पक्षियों से प्रेम इस पाठ की मूल संवेदना है। अपने अनुभव के आधार ऐसे किसी प्रसंग से जुड़ी रोचक घटना को कलात्मक शैली में लिखिए।
उत्तर:- 
एक गाँव में एक किसान रहता था। उसके पास दो बैल थे। वह अपने बैलों को बच्चों की तरह स्नेह करता था। वह उन्हें अपनी आँखों से दूर नहीं करना चाहता था। उन्हें खाना खिलाकर ही खुद खाता था। एक बार एक बैल बीमार हो गया उसने खाना पीना छोड़ दिया। इस वजह से किसान ने भी खाना -पीना छोड़ दिया। किसान का प्यार देखकर बैल की आँखों से आँसू बहने लगे। इससे पता चलता है कि किसान अपने पशुओं से मानवीय व्यवहार करते हैं। किसान पशुओं को घर के सदस्य की भांति प्रेम करते रहे हैं और पशु अपने स्वामी के लिए जी-जान देने को तैयार रहते हैं।

7. • गुरुदेव ज़रा मुस्करा दिए।
• मैं जब यह कविता पढ़ता हूँ।
ऊपर दिए गए वाक्यों में एक वाक्य में अकर्मक क्रिया है और दूसरे में सकर्मक । इस पाठ को ध्यान से पढ़कर सकर्मक और अकर्मक क्रिया वाले चार चार वाक्य छाँटिए।
उत्तर:- 
पाठ से सकर्मक और अकर्मक क्रिया वाले चार-चार वाक्य –
सकर्मक क्रिया वाले वाक्य –
1. बच्चों से जरा छेड़छाड़ की, कुशल क्षेम पूछे।
2. हम लोग उस कुत्ते के आनंद को देखने लगे।
3. इतनी ही स्वीकृति पाकर ही उसके अंग-अंग में आनंद का प्रवाह बह उठता है।
4. गुरुदेव ने इस भाव की एक कविता लिखी थी।
अकर्मक क्रिया वाले वाक्य –
1. हम लोगों को देखकर मुस्कराए।
2. दूसरी बार मैं सवेरे गुरुदेव के पास उपस्थित था।
3. ऐसे दर्शनार्थियों से गुरुदेव कुछ भीत-भीत से रहते थे।
4. उस समय एक लँगड़ी मैना फुदक रही थी।

8. निम्नलिखित वाक्यों में कर्म के आधार पर क्रिया -भेद बताइए |
उत्तर:-
वाक्यक्रिया -भेद
मीना कहानी सुनाती है।
अभिनव सो रहा है।
गाय घास खाती है।
मोहन ने भाई को गेंद दी।
लड़कियाँ रोने लगीं।
वाक्यक्रिया -भेद
मीना कहानी सुनाती है।सकर्मक क्रिया
अभिनव सो रहा है।अकर्मक क्रिया
गाय घास खाती है।सकर्मक क्रिया
मोहन ने भाई को गेंद दी।सकर्मक क्रिया
लड़कियाँ रोने लगीं।अकर्मक क्रिया

9. नीचे पाठ में से शब्द-युग्मों के कुछ उदाहरण दिए गए हैं ; जैसे –
समय – असमय, अवस्था-अनवस्था
इन शब्दों में ‘अ’ उपसर्ग लगाकर नया शब्द बनाया गया है।
पाठ में से कुछ शब्द चुनिए और उसमे ‘अ’ एवं ‘अन्’ उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाइए।
उत्तर:- 
‘अ’ उपसर्ग लगाने से बने शब्द-
चल – अचलकारण – अकारण
प्रचलित – अप्रचलितविश्वास – अविश्वास
शांत – अशांतभाव – अभाव
नियमित – अनियमितमूल्य – अमूल्य
‘अन्’ उपसर्ग लगाने से बने शब्द-
उपयोग – अनुपयोगउद्देश्य – अनुद्देश्य
उपस्थित – अनुपस्थितअवस्था – अनावस्था

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