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शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

#EXAM TIME-: ये 7 टिप्‍स अपनाएंगे तो हर पेपर में अच्‍छे मार्क्‍स आएंगे...

एग्‍जाम कोई भी हो, हर स्‍टूडेंट के अंदर अक्‍सर डर बैठा होता है. लेकिन पेपर में अच्‍छा स्कोर करना इतना कठि‍न भी नहीं है. थोड़ी प्लानि‍ंग और कुछ आसान तरीकों को जानकार न सिर्फ आपकी घबराहट दूर होगी बल्कि आप नंबरों के मामले में भी किसी से पीछे नहीं रहेंगे. 


सुबह की पढ़ाई: 
वैसे तो सभी जानते हैं कि सुबह पढ़ना कितना लाभदायक है क्योंकि एक अच्छी नींद के बाद आप एकदम ताजा और ऊर्जा से भरे होते हैं. सुबह के समय शांति का भी माहौल रहता है. इसीलिए कहते भी हैं कि जल्दी सोना, जल्दी उठना आदमी को स्वस्थ, संपन्न और बुद्ध‍िमान बनाता है. सुबह की हुई पढ़ाई आप लंबे समय तक याद रखते हैं. 
अच्छा खाएं:
जी हां, अच्छे नंबर के लिए आपको अच्छा खाना भी होगा. आपकी डाइट ऐसी होनी चाहिए जिसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक से अधिक हो. खाने में हरी सब्जियां, ताजा फल, डेयरी उत्पाद, अंडे, मछली और मीट को शामिल करें. सूप, ग्रीन टी और फ्रेश जूस आपके डाइट चार्ट में हो. और हां, जंक फूड से दूरी बनाए रखें.
समय प्रबंधन:
किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने का पहला नियम टाइम मैनेजमेंट होता है. आप अच्छे नंबर पाने के लिए टाइम मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दें. हर विषय को समय के अनुसार बांट लें. जिस विषय में आपकी पकड़ कमजोर है, उसे ज्यादा से ज्यादा समय दें. जो टॉपिक हमें आते हैं, उनको हम अक्सर दोहराने के लिए पूरा समय नहीं देते. ये गलती न करें, बल्कि विषय के लिए बराबर का समय न‍िश्चि‍त करें. 
कॉन्सेप्ट को समझें: 
सिलेबस के हिसाब से हमेशा तैयारी ना करें. हर बार इसका काम करना जरूरी नहीं है. आवश्यक है कि आप पहले विषय को समझें और फिर आगे बढ़ें. कई बार क्या होता है कि आप रटकर एग्जाम में जाते हैं और अगर प्रश्नपत्र में सवाल थोड़ा अलग हो जाता है तो घबराहट होती है. ऐसे में आप विषय को समझकर एग्जाम में बैठेंगे तो हर तरह से जवाब देने के लिए तैयार होंगे.
नोट्स बनाएं:
यह जांचा और परखा हुआ नियम है. नोट्स हमेशा आपकी मदद करेंगे. जब भी आप पढ़ें या रिवीजन करें तो ध्यान से उसके नोट्स बनाते चलें.
सैंपल पेपर:
ज्यादातर मौके पर हर कोई आपको सैंपल पेपर हल करने की सलाह देता होगा. यह काफी कारगर हो सकता हैं. पिछले कुछ सालों के प्रश्नपत्रों को आप इकठ्ठा कर कई सवालों को जान सकते हैं. उन प्रश्नों को हल करें इससे आपके अंदर विश्वास पैदा होगा. साथ ही सिलेबस भी पूरा किया जा सकेगा. क्या पता कई सवाल उनमें से ही आ जाएं. 
टालें नहीं:
'कल करें सो आज कर, आज करे सो अब' इस कहावत को हमेशा याद रखें. अक्सर बच्चे पढ़ाई टालते हैं और बाद में पूरा सिलेबस देखकर दवाब में आ जाते हैं. अधूरा काम बाद में करने से आपके रिजल्ट पर असर पड़ता है. प्रतिदिन लक्ष्य निर्धारित करें और उसी के हिसाब से तैयारी शुरू करें. 

शनिवार, 12 जनवरी 2019

12 जनवरी : स्वामी विवेकानंद जन्मदिन

12 जनवरी : स्वामी जन्मदिन
'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए' का संदेश देने वाले युवाओं के प्रेरणास्त्रो‍त, समाज सुधारक युवा युग-पुरुष 'स्वामी विवेकानंद' का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता (वर्तमान में कोलकाता) में हुआ। इनके जन्मदिन को ही राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। 


 
उनका जन्मदिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाए जाने का प्रमु्ख कारण उनका दर्शन, सिद्धांत, अलौकिक विचार और उनके आदर्श हैं, जिनका उन्होंने स्वयं पालन किया और भारत के साथ-साथ अन्य देशों में भी उन्हें स्थापित किया। उनके ये विचार और आदर्श युवाओं में नई शक्ति और ऊर्जा का संचार कर सकते हैं। उनके लिए प्रेरणा का एक उम्दा स्त्रोत साबित हो सकते हैं।

किसी भी देश के युवा उसका भविष्य होते हैं। उन्हीं के हाथों में देश की उन्नति की बागडोर होती है। आज के पारिदृश्य में जहां चहुं ओर भ्रष्टाचार, बुराई, अपराध का बोलबाला है जो घुन बनकर देश को अंदर ही अंदर खाए जा रहे हैं। ऐसे में देश की युवा शक्ति को जागृत करना और उन्हें देश के प्रति कर्तव्यों का बोध कराना अत्यंत आवश्यक है। विवेकानंद जी के विचारों में वह क्रांति और तेज है जो सारे युवाओं को नई चेतना से भर दे। उनके दिलों को भेद दे। उनमें नई ऊर्जा और सकारात्कमता का संचार कर दे।

स्वामी विवेकानंद की ओजस्वी वाणी भारत में तब उम्मीद की किरण लेकर आई जब भारत पराधीन था और भारत के लोग अंग्रेजों के जुल्म सह रहे थे। हर तरफ सिर्फ दु्‍ख और निराशा के बादल छाए हुए थे। उन्होंने भारत के सोए हुए समाज को जगाया और उनमें नई ऊर्जा-उमंग का प्रसार किया।

सन् 1897 में मद्रास में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था 'जगत में बड़ी-बड़ी विजयी जातियां हो चुकी हैं। हम भी महान विजेता रह चुके हैं। हमारी विजय की गाथा को महान सम्राट अशोक ने धर्म और आध्यात्मिकता की ही विजयगाथा बताया है और अब समय आ गया है भारत फिर से विश्व पर विजय प्राप्त करे। यही मेरे जीवन का स्वप्न है और मैं चाहता हूं कि तुम में से प्रत्येक, जो कि मेरी बातें सुन रहा है, अपने-अपने मन में उसका पोषण करे और कार्यरूप में परिणत किए बिना न छोड़ें। 

हमारे सामने यही एक महान आदर्श है और हर एक को उसके लिए तैयार रहना चाहिए, वह आदर्श है भारत की विश्व पर विजय। इससे कम कोई लक्ष्य या आदर्श नहीं चलेगा, उठो भारत...तुम अपनी आध्यात्मिक शक्ति द्वारा विजय प्राप्त करो। इस कार्य को कौन संपन्न करेगा?' स्वामीजी ने कहा 'मेरी आशाएं युवा वर्ग पर टिकी हुई हैं'।

स्वामी जी को यु्वाओं से बड़ी उम्मीदें थीं। उन्होंने युवाओं की अहं की भावना को खत्म करने के उद्देश्य से कहा है 'यदि तुम स्वयं ही नेता के रूप में खड़े हो जाओगे, तो तुम्हें सहायता देने के लिए कोई भी आगे न बढ़ेगा। यदि सफल होना चाहते हो, तो पहले ‘अहं’ ही नाश कर डालो।' उन्होंने युवाओं को धैर्य, व्यवहारों में शुद्ध‍ता रखने, आपस में न लड़ने, पक्षपात न करने और हमेशा संघर्षरत् रहने का संदेश दिया।



स्वामी विवेकानंद जी के बहुत ही प्रसिद्ध,अनमोल,कीमती,प्रेरक,प्रेरणादायक,ऊर्जावान एवं प्रासांगिक विचार..(Thoughts Of Vivekanad Ji)


गुरुवार, 20 दिसंबर 2018

study tour of classes-3 to 12


Quiz competition


study tour of classes-1&2


English skit


classroom teaching


scout students



make it shorter


community lunch


national integration day


मंगलवार, 4 दिसंबर 2018

भेड़ बनकर मिमियाना चाहते हो या शेर बनकर दहाड़ना? सोच लो!

क्या आप शीप (भेड़) बनना पसंद करेंगे या शेर?
बिल्कुल शेर!!
लेकिन आपने कभी यह सोचा है की आप शेर है या शीप(भेड़)???
कडवा सच कहूँ तो ज्यादातर लोग शीप ही है ।
वो जी तो रहे है लेकिन जिंदगी के सामने दहाड़ कर अपने उसूलों, अपने दम पर नहीं जी रहे बल्कि जिंदगी और अपने सपनों के सामने एक शीप(भेड़) की तरह घुटने टेक मिमियाते जी रहे है ।
तो जानते है की यह शीप की तरह जीना क्या है और शेर की तरह जीना क्या है ।
इसके लिए हमें शीप और शेर की थ्योरी समझनी होगी ।

शीप और शेर थ्योरी

पहले शीप की बात करते है,

शीप का जीवन

शीप का जीवन गड़रिये के इशारों पे चलता है, जहाँ गड़रिया ले चले वहां चलता है और दूसरे शीप की तरह ही चलता है ।
शीप के अपने कोई सपने नहीं होते, शीप की अपनी कोई मंजिल नहीं होती बस वो तो जहाँ गड़रिया ले चले वहाँ चलता है, जहाँ और शीप जा रहे है ठीक वहाँ वो भी चलता है ।
शीप के पास कोई सवाल नहीं है की वो भी वहां जाए तो क्यों जाए और न जाए तो कहा जाए, वो तो बस दूसरे शीप को देख के सर झुकायें अंधभक्त की तरह पीछा किये जाता है और अगर वो अपनी ऐसी परिस्थितियों से दुखी हो जाता है तो ज्यादा से ज्यादा मिमिया लेता है और फिर से उसी तरह जीने लगता है ।
न तो आँखों में कोई सपने (Dreams) है, न ही जिंदगी जीने का जोश और जुनून बस एक के पीछे एक चले जा रहा है ।
अब बात करते है एक शेर की,

शेर का जीवन

शेर का कोई मालिक नहीं होता वो खुद ही अपना मालिक है ।
शेर एक योद्धा की तरह जीता है जब तक जीता है अपने उसूलों पे जीता है अपने दम पर जीता है ।
उसे कोई चला नहीं सकता क्योंकि वो जंगल का राजा है वो अपनी मर्जी का मालिक है जो दिल में आये वही करता है ।
शेर अगर किस भी परिस्थितियों से परेशान है तो वो मिमियाता नहीं बल्कि शेर दहाड़ कर लड़ता है, ज्यादातर परेशानियां तो उसकी दहाड़ सुनकर ही भाग जाती है ।
शेर अपने शिकार का सपनों की तरह चेज (पीछा) करता है, उसके लिए लड़ता है और अपनी मंजिल खुद तय करता है इसलिए वो राजा है जंगल का और अपने दिल का भी ।
शेर की आँखों में जुनून होता है, दहाड़ में आत्मविश्वास और जिंदगी अपने उसूलों पर जीने का हौसला होता है ।
अब देखते है की यह थ्योरी से हम कैसे जुड़े हुए है ।

क्या हम भी शेर है?

एक्चुअली इंसान इस थ्योरी की तरह ही जी रहा है, जैसे या तो वो शेर है या शीप ।
कुछ लोग शीप की तरह है तो कुछ लोग शेर की तरह है ।
लेकिन देखे तो शीप ज्यादा है शेर कम ।
शीप वो सब है जो अपने दिल की नहीं सुनते और बस लोगो को देख देख कर ही आगे बढ़ रहे या जो और लोग बोल रहे वही कर रहे है ।
शीप वो है जिनके पास कोई मंजिल ही नहीं है और नहीं कोई सपने है । और अगर सपने है भी तो इसके पीछे भागने की हिम्मत नहीं है ।
सपने छोड़ दिए है अंदर से मर चुके है परिस्थितियों को स्वीकार कर लिया है, किसी ने कहा की यह तो नामुमकिन है इसलिए हार मान चुके है ।
शीप वो है जो कुछ विफलताओं से फड़फड़ा उठे है और प्रयास करना छोड़ चुके है ।
शीप वो लोग है जिनका जीवन अपने कंट्रोल में नहीं है, जो अपने हिसाब से नहीं दूसरों के नजरिये से जी रहे है वो बस अंधो की तरह वो किये जा रहे जो उन्हें पसंद नहीं लेकिन सब कर रहे इसलिए वो भी कर रहे है ।
ऐसे लोगो का जीवन बस गडरिये के भरोसे चल रहा है पता नहीं कहा जा रहे है क्यों जा रहे ।
और कुछ लोग शेर की तरह होते है जो बस अपने ही दिल की सुनते है, अपने हिसाब से चलते है उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और क्या कर रहे है या क्या सोच रहे है वे तो बस तूफ़ान की तरह अपनी मस्ती में चल रहे है वे आते है और रिकॉर्ड तोड़ जाते है ।
वे सपने देखते है, अपनी मंजिल ढूंढते है और पूरे जोश जुनून से जैसे एक शेर अपने शिकार का पीछा करता है ठीक वैसे ही ये लोग अपने सपनों का पीछा करते है और जब तक इसे धर दबोच ना ले तब तक रुकते नहीं ।
चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हो लेकिन यह अपना सर नहीं झुकाते, हार नहीं मानते और नहीं मिमियाते है बल्कि आँखों में जुनून और बाहों में ज्वाला सा जोश भरकर लड़ते है और राजा बन जाते है ।
ह शेर नरेन्द्र मोदी है, वह शेर सचिन तेंदुलकर है, वह शेर अब्दुल कलाम है, वह विराट कोहली है, वह दशरथ मांझी है, वह संदीप महेश्वरी है वह मैरी कॉम है, वह हर एक वो व्यक्ति है जो अपने सपनों के लिए लड़ रहा, वह हर एक वो व्यक्ति है जो अपने दिल से जी रहा है ।

आपका जीवन

  • तो क्या आप भी सपने देख रहे है?
  • क्या आप भी अपने दिल की बात सुन रहे है?
  • क्या आप भी 50 बार गिर कर भी खड़े हो रहे है?
  • क्या आप भी परिस्थितियों को चीर कर आगे बढ़ रहे है?
  • क्या आप भी एक आग अपने दिल में संजोए घूम रहे है?
  • क्या आप भी मिमियाने की बजाय शेर दहाड़ कर रहे है?
अगर हां तो आप भी शेर है!
मुबारक हो आप शेर है और इस पूरे विश्व के राजा, मुबारक हो आप अपनी नियति खुद बना रहे, मुबारक हो आप ही है असली विश्व विजेता सिकंदर ।
तो उठो अपने सपनों से जी चुराकर भागो मत बल्कि उसके पीछे शेर की तरह भागो, फेलियर के दर से मिमियाओ मत बल्कि अपनी जीत की उद्घोषणा की दहाड़ करो

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